दृढ़ श्रद्धा बनाये रखो

किसी भी तरह के हतोत्साह को अपने ऊपर हावी मत होने दो और ‘भागवत कृपा’ पर कभी अविश्वास न करो। तुम्हारे बाहर, तुम्हारे चारों ओर जो भी कठिनाइयाँ हैं, तुमहारें अंदर जो भी कठिनाइयाँ हैं, अगर तुम अपनी श्रद्धा और अपनी अभीप्सा पर कसी हुई पकड़ बनाये रखो, ‘गुप्त’ शक्ति तुम्हें तुम्हारी कठिनाइयों से पार निकाल कर तुम्हें यहाँ वापिस ले आयेगी। भले तुम विरोधों और कठिनाइयों के बोझ तले तब जाओ, भले तुम ठोकरों पर ठोकरों खाओ, यहाँ तक कि सामने अंधी गली जान पड़े, लेकिन अपनी अभीप्सा की पकड़ को कभी ढीला न छोड़ो, अगर कभी श्रद्धा पर बादल घिर आयें, अपने मन और हृदय में हमेशा हमारी ओर मुड जाओ और वे बादल तितर-बितर हो जायेंगे।

संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र 

शेयर कीजिये

नए आलेख

न कुछ शुभ,न कुछ अशुभ

किसी भी ग़लत गति को भूमिगत की जगह उसे निवेदित कर देना चाहिये। उस चीज़…

% दिन पहले

पथ पर डटे रहो

तुम सभी, मेरे बच्चो, मैं तुमसे यह कह सकती हूँ, मैंने यह कई बार दोहराया…

% दिन पहले

योग के लिए आना

जीवन से और लोगों से घृणा और विरक्ति के कारण इस योग के लिए नहीं…

% दिन पहले

धर्मक्षेत्र

सारा जीवन ही धर्मक्षेत्र है, संसार भी धर्म है। केवल आध्यात्मिक ज्ञानलोचना और शक्ति की…

% दिन पहले

गर्व को त्यागने का तरीका

भगवान् के प्रति पूर्ण आत्मदान के लिए तीन विशेष विधियां : १. सारे गर्व को…

% दिन पहले

ज्ञान और बुद्धि

मधुर माँ,  ज्ञान और बुद्धि क्या हैं ? क्या हमारे जीवन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका…

% दिन पहले