मधुर माँ,
हम दूसरे की आवश्यकता को कैसे जान सकते और उसकी सहायता कैसे कर सकते हैं ?
मैं बाहरी चीजों और मानसिक क्षमताओं की बात नहीं कर रही थी ! सच्चा प्रेम अन्तरात्मा में होता है (बाकी सब प्राणिक आकर्षण या मानसिक अथवा भौतिक आसक्ति के सिवा कुछ नहीं है ) और अंतरात्मा या चैत्य पुरुष सहज वृत्ति से जानता है कि दुसरें को क्या पाने की जरूरत है और हमेशा उसे वह देने के लिए तैयार रहता है ।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)
भगवान के प्रति पूर्ण आत्म-दान के लिए तीन विशेष विधियाँ : (१) सारे गर्व को…
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हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…