हे प्रभु ! किस तीव्रता के साथ मेरी यह अभीप्सा तेरी ओर उठ रही है। तू अपने विधानका हमें पूरा ज्ञान दे, तेरी इच्छाका हमें अनवरत मान ताकि तेरे निश्चय हमारे निश्चय हों, जीवन केवल तेरी सेवामें अर्पित हो और तेरी प्रेरणा को यथासंभव पूर्ण रूपसे प्रकट करे।
हे स्वामी ! दूर कर सब अंधकार, सब अंधता, और ऐसी कृपा कर कि हर कोई उस स्थिर निश्चयात्मक ज्ञानका आनंद लाभ करे जो तेरे देवी प्रकाश से मिलता है।
सन्दर्भ : प्रार्थना और ध्यान
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…
अभीप्सा का तात्पर्य है, शक्तियों को पुकारना । जब शक्तियाँ प्रत्युत्तर दे देती हैं, तब…