तुम अकेलापन इसलिए लगता है क्योंकि तुम प्रेम पाने की आवश्यकता का अनुभव करते हो । बिना मांग किये, केवल प्रेम के आनंद के लिए (संसार का सबसे अद्भुत आनंद !) प्रेम करना सीखो और तुम फिर कभी अकेला अनुभव नहीं करोगे ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग – २)

शेयर कीजिये

नए आलेख

श्रीअरविंद से मिलना

श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…

% दिन पहले

उपस्थिति का अनुभव

हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…

% दिन पहले

ध्यान कहाँ?

मधुर माँ , यहाँ  अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल…

% दिन पहले

प्रगतिशील बनों

कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…

% दिन पहले

केवल एक सहारा

भगवान के सिवा कभी किसी दूसरे मनुष्य या दूसरी वस्तु पर, वह चाहे जो हो…

% दिन पहले

श्रीमाँ के बालक

तुम माँ के बच्चे हो और माँ का अपने बच्चों के प्रति प्रेम असीम होता…

% दिन पहले