कब तक तुम इस मन के गोलाकार पथों पर चक्कर खाते रहोगे ?
अपनी क्षुद्र अहम सत्ता और नगण्य वस्तुओं से घिरे रहोगे ?
संदर्भ : सावित्री
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…