कब तक तुम इस मन के गोलाकार पथों पर चक्कर खाते रहोगे ?
अपनी क्षुद्र अहम सत्ता और नगण्य वस्तुओं से घिरे रहोगे ?
संदर्भ : सावित्री
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…