एक प्रार्थना, एक श्रेष्ठ कर्म, एक उत्कृष्ट उद्भावना
कर सकती है युक्त मानव-बल को, एक परात्पर शक्ति से ।
संदर्भ : “सावित्री”
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…