एक प्रार्थना, एक श्रेष्ठ कर्म, एक उत्कृष्ट उद्भावना
कर सकती है युक्त मानव-बल को, एक परात्पर शक्ति से ।
संदर्भ : “सावित्री”
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…