हमारे योग में एकाग्रता का मतलब है जब चेतना किसी विशेष स्थिति में (जैसे शांति में) या किसी क्रिया में (जैसे अभीप्सा, संकल्प, श्रीमाँ के साथ संपर्क, श्रीमाँ का नाम-जप में) केंद्रीभूत होती है । और ध्यान वह है जब आन्तरिक मन चीजों का सम्यक ज्ञान प्राप्त करने के लिए उनका अवलोकन करता है ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग-२)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…