१) दूसरों पर नियंत्रण रख सकने के लिए स्वयं अपने ऊपर पूर्ण नियंत्रण पाना अनिवार्य शर्त है।
२) कोई पसन्द न होना, एक को पसन्द और दूसरे को नापसन्द करना, नहीं, हर एक के साथ समान होना।
३) हर एक के साथ धीरज रखना और सहिष्णु होना।
और साथ ही, केवल वही बोलना जो एकदम अनिवार्य हो, उससे अधिक नहीं ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…