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अनुभूति और तार्किक मन

अनुभूति तार्किक मन से बहुत आगे तक जाती है । स्पष्ट है कि तार्किक मन को भगवान् तक पहुंचाना बहुत कठिन लगता है लेकिन सरल हृदय उनसे लगभग बिना किसी विशेष प्रयास के नाता जोड़ सकता है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग -२)

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