‘सत्य’ मिथ्यात्व से बढ़ कर बलवान है। एक अमर ‘शक्ति’ जगत पर शासन करती है। उसके निश्चय हमेशा सफल होते हैं। उसके साथ हो जाओ तो तुम अंतिम विजय के बारे में निश्चित रहोगे।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…