तेरी नयी अभिव्यक्ति
… मैं सभी वस्तुओं में प्रवेश करती हूँ, प्रत्येक परमाणु के हृदय में निवास करते हुए मैं वहाँ उस अग्नि को उद्बुद्ध करती हूँ जो...
… मैं सभी वस्तुओं में प्रवेश करती हूँ, प्रत्येक परमाणु के हृदय में निवास करते हुए मैं वहाँ उस अग्नि को उद्बुद्ध करती हूँ जो...
जैसे ही किसी अभिव्यक्ति से समस्त प्रयास लुप्त हो जाता है, सारी चीज़ बहुत सरल हो जाती है, खिलते हुए फूल की तरह सरल जो...
हे प्रभो, प्रेम के मधुर स्वामी, तू हमें अन्धकार में से बाहर निकालता है ताकि हम चेतना की ओर जागें, हमें दुःख-दर्द से मुक्त करता...
‘तेरे’ आगे नीरवता में बीते कुछ क्षण आनंद की शताब्दियों के बराबर हैं। … ओह ! कितना मधुर है नीरवता में ‘तेरे’ आगे उपस्थित रहना...
हे तू, एकमात्र परम सद्वस्तु, हमारे प्रकाश के प्रकाश और हमारे जीवन के जीवन, हे परम प्रेम, हे संसार के त्राता, वर दे कि मैं...
हर उपस्थित व्यक्ति के साथ सचेतन संपर्क स्थापित कर लेने के बाद मैं ‘परम प्रभु’ के साथ एक हो जाती हूँ और तब मेरा शरीर...
गहरे और मौन निदीध्यासन या लिखित या अलिखित ध्यान की जगह हमें हर क्षण की क्रियाशीलता में तेरी सेवा करनी चाहिए और अपने-आपको तेरे साथ...
हे प्रभों, तू मेरा आश्रय और मेरा वरदान है, मेरा बल, मेरा स्वस्थ्य, मेरी आशा और मेरा साहस है । तू ही परम शांति, अमिश्रित...
हे समस्त वरदानों के ‘परम वितरक’, तुझे, जो इस जीवन को शुद्ध सुन्दर और शुभ बना कर उसे औचित्य प्रदान करता है, तुझे, हे हमारी...
ओह, बेचैन क्यों हुआ जाये और यह चाह क्यों की जाये कि हमारे लिए वस्तुएँ अमुक दिशा ही अपनाएँ, कोई और नहीं ! यह निश्चय...