सच्चा पुनरुज्जीवन
हमारे लिए, पुनरुज्जीवन का अर्थ है, पुरानी चेतना का झड़ जाना; लेकिन यह केवल पुनर्जन्म नहीं है जो अतीत के साथ पूरी तरह सम्बन्ध तोड़...


















हमारे लिए, पुनरुज्जीवन का अर्थ है, पुरानी चेतना का झड़ जाना; लेकिन यह केवल पुनर्जन्म नहीं है जो अतीत के साथ पूरी तरह सम्बन्ध तोड़...
(श्रीमाँ श्रीअरविंद से २९ मार्च १९१४ को पहली बार मिली थीं और यह प्रार्थना उन्होने १ अप्रैल १९१४ को लिखी थी। ) मुझे लगता है...
हे माँ, मैं आपसे सचमुच बहुत दूर हूँ ! इसका कारण यह है कि तुम बहुत बिखरे हुए हो – तुम्हारी चेतना एकाग्र रहने की...
इसपर विचार मत करो कि लोग तुमसे सहमत हैं या असहमत अथवा तुम अच्छे हो या बुरे, वरन यह विचार करो कि “माताजी मुझसे प्रेम...
यह बहुधा घटित होता है कि दर्शन-दिवस के समीप आते ही विरोधी शक्तियां एकजुट हो जाती हैं और व्यक्तिगत रूप में या व्यापक तौर पर...
मां, हमारा सच्चा आध्यात्मिक जीवन कहां से आरम्भ होता है? सच्चा आध्यात्मिक जीवन तब आरम्भ होता है जब मनुष्य को अपने चैत्य पुरुष के अन्दर...
यौवन इस बात पर निर्भर नहीं है कि हम कितने छोटे हैं, बल्कि इस पर कि हम मे विकसित होने की क्षमता और प्रगति करने...
वास्तविक तथ्य यह है कि विश्व में जिस चीज़ में तुम्हारी दिलचस्पी है – सीधे या घुमावदार रूप में, वह तुम स्वयं हो। यही कारण...
माँ, ऐसी कौन-सी चीज़ है हो मुझे हमेशा यह याद रखने में सहायता देगी कि मैं आध्यात्मिक जीवन जी रहा हूँ ? श्री माँ का...
आत्म-विश्वास के बिना तुम कभी कुछ नहीं कर सकते … क्योंकि साधना के प्रारम्भिक बेचैनी-भरे वर्षों में तुम्हारे पास और कोई सहारा नहीं होता, जब...