तुम्हें जो चीज़ जाननी चाहिये वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन में क्या करना चाहते हो…
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार करने के लिए मैंने उस…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी सहायता और तुम्हारा मार्गदर्शन कर…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के रस का कुछ अंश होता…
प्रश्न : मन मे वाद-विवाद को कैसे रोका जाये ? पहली शर्त है जितना हों सके उतना कम बोलो…
. . . मैं यहाँ भौतिक उदारता की चर्चा नहीं करूँगी जिसका स्वाभाविक स्वरूप है अपने पास जो कुछ हो…
केवल ईश्वर के ही प्रभाव से प्रभावित होना, और किसी के प्रभाव को स्वीकार न करना - यही पवित्रता है…
किसी भी ग़लत गति को भूमिगत की जगह उसे निवेदित कर देना चाहिये। उस चीज़ को, स्वयं उस गति को…