श्री माँ के वचन

सबसे महत्वपूर्ण चीज़

तुम्हें जो चीज़ जाननी चाहिये वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन में क्या करना चाहते हो…

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प्रभो, वर दे!

उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार करने के लिए मैंने उस…

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भगवान तुम्हारे साथ हैं

यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी सहायता और तुम्हारा मार्गदर्शन कर…

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चिंता

चिंता करना जहर का प्याला पीने के समान है । संदर्भ : पथ पर 

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यादें

हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के रस का कुछ अंश होता…

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कभी-कभी

कभी-कभी मनुष्य को न जानना भी जानना चाहिए। संदर्भ: श्रीमाँ का एजेंडा (भाग-१)

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मन के वाद-विवाद

प्रश्न : मन मे वाद-विवाद को कैसे रोका जाये ?   पहली शर्त है जितना हों सके उतना कम बोलो…

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उदारता

. . .  मैं यहाँ भौतिक उदारता की चर्चा नहीं करूँगी जिसका स्वाभाविक स्वरूप है अपने पास जो कुछ हो…

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पवित्रता

केवल ईश्वर के ही प्रभाव से प्रभावित होना, और किसी के प्रभाव को स्वीकार न करना - यही पवित्रता है…

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न कुछ शुभ,न कुछ अशुभ

किसी भी ग़लत गति को भूमिगत की जगह उसे निवेदित कर देना चाहिये। उस चीज़ को, स्वयं उस गति को…

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