क्या यह सम्भव है कि काम करते समय यह याद रखा जाये कि हमारे द्वारा माताजी ही काम कर रही…
"मनुष्य जो कुछ पहले कर चुका है उसे ही हमेशा दुहराते जाना हमारा काम नहीं है, बल्कि हमें नवीन सिद्धियों…
श्रीमाँ श्रीअरविन्द' की शिष्या नहीं हैं। उन्हें मेरे समान ही सिद्धि और अनुभूति प्राप्त थी। श्रीमाँ की साधना छोटी उम्र…
प्रायः ही श्रीअरविंद कहते हैं कि व्यक्ति को श्रीमाँ की शक्ति को शासन करने देना चाहिये । क्या इसका यह…
मार्गदर्शक स्वयं तुम्हारें अपने अन्दर है। यदि तुम केवल 'उसे' पा सको और 'उसकी' आवाज़ सुन सको, तब तुम यह…
दूसरे व्यक्ति के साथ बात करके अवसन्न हो जाना किसी व्यक्ति के लिये बिलकुल संभव है। बातचीत करनेका अर्थ है…
अधः लोक की अन्ध शक्तियाँ अब भी किन्तु प्रबल हैं। आरोहण की गति धीमी है, लम्बा बहुत समय है। तब…
ध्यान का भारतीय भाव व्यक्त करने के लिए अंग्रेजी में दो शब्दों का प्रयोग किया जाता है, "मेडिटेशन" तथा "कण्टेम्पलेशन"।…
श्रीमाताजी सभी साधकों के चारों ओर अपना संरक्षण रखती हैं, परंतु वे यदि अपने ही कर्म या मनोभाव के कारण…
औषधि उतना रोगमुक्त नहीं करती जितना कि चिकित्सक और औषधि में रोगी की श्रद्धा करती है। मनुष्य की अपनी निजी…