किसी व्यक्ति को निरुत्साहित करना अनुचित है, परंतु मिथ्या उत्साह देना अथवा किसी अनुचित वस्तु के लिए उत्साहित करना ठीक नहीं है । कठोरता का कभी-कभी उपयोग करना पड़ता है । (यद्यपि उसका अत्यधिक उपयोग नहीं होना चाहिए) जबकि इसके बिना अनुचित बात पर होने वाले हठीले आग्रह को सुधारा नहीं जा सकता है ।

संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग -२)

शेयर कीजिये

नए आलेख

प्रभो, वर दे!

उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…

% दिन पहले

तीन शर्तें

भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…

% दिन पहले

भगवान तुम्हारे साथ हैं

यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…

% दिन पहले

चिंता

चिंता करना जहर का प्याला पीने के समान है । संदर्भ : पथ पर 

% दिन पहले

महान अंत ? या महान आरंभ?

जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…

% दिन पहले

यादें

हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…

% दिन पहले