मन के वाद-विवाद
प्रश्न : मन मे वाद-विवाद को कैसे रोका जाये ? पहली शर्त है जितना हों सके उतना कम बोलो । दूसरी शर्त है, केवल...
प्रश्न : मन मे वाद-विवाद को कैसे रोका जाये ? पहली शर्त है जितना हों सके उतना कम बोलो । दूसरी शर्त है, केवल...
व्यवस्था हम अवश्य करें, किन्तु व्यवस्था या नियम बनाने और उसके पालन में भी हमें सदा इस सत्य पर दृढ़ विश्वास बनाये रखना चाहिये कि...
जीवन की कठिन घड़ियों में हर एक का अत्यावश्यक कर्तव्य है भगवान के प्रति समग्र, अप्रतिबंध आत्म निवेदन में अपने अहंकार पर विजय पाना ।...
ओह, बेचैन क्यों हुआ जाये और यह चाह क्यों की जाये कि हमारे लिए वस्तुएँ अमुक दिशा ही अपनाएँ, कोई और नहीं ! यह निश्चय...
जब तुम अपने हृदय और विचार में मेरे ओर श्रीअरविन्द के बीच कोई भेद न करोगे, जब अनिवार्य रूप से श्रीअरविन्द के बारे में सोचना...
जो लोग अन्धकार और मिथ्यात्व की शक्तियों पर ‘सत्य’ की ज्योति के विजयी होने में सहायता करना चाहते हैं वे अपनी गतिविधियों और क्रियाओं को...
समृद्धि केवल उसी के साथ टिकी रह सकती है जो उसे भगवान को अर्पित करता है । संदर्भ : माताजी के वचन (भाग -२)
सुखी तथा सफल जीवन के लिए सच्चाई, नम्रता, अध्यवसाय और प्रगति के लिए कभी न बुझने वाली प्यास जरूरी हैं । सबसे बढ़ कर यह...
माँ, ऐसी कौन-सी चीज़ है हो मुझे हमेशा यह याद रखने में सहायता देगी कि मैं आध्यात्मिक जीवन जी रहा हूँ ? श्री माँ...
हमारा मूल्य अपने-आपका अतिक्रमण करने के प्रयास के परिमाण में है, और अपने-आपका अतिक्रमण करने का अर्थ है , भगवान को पाना । आखिर यह...