("माताजी के भारत के मानचित्र" के बारे में जो आश्रम के क्रीड़ांगड़) यह सब तरह के अस्थायी रूपों के बावजूद…
जब अतिमानस दैहिक मन में अभिव्यक्त होगा, केवल तभी उसकी उपस्थिती स्थायी हो सकती है । संदर्भ : माताजी के…
मुझे लगता है कि हम तेरे मंदिर के गर्भगृह के हृदय में जा पहुंचे हैं और तेरी ही इच्छा के…
मेरे अनुभव के अनुसार तो जब लोग एकान्तवास करते हैं तो तमस् में जा गिरते हैं । संदर्भ : माताजी…
बिलकुल स्वाभाविक रूप से हम अपने-आपसे पूछते हैं कि वह कौनसा रहस्य है जहां पीड़ा हमें ले जाती है। एक…
हमारे युग में सफलता और उससे मिलने वाली भौतिक तुष्टि का ही मूल्य है। फिर भी असन्तुष्ट लोगों की हमेशा…
जो प्रगति करना चाहते हैं उनके लिए अभी बहुत विशेष अवसर है क्योंकि रूपान्तर शुरू होता है नयी शक्तियों की…
भय और संकोच के बिना, हमेशा अधिक ऊंचे, अधिक दूर तक उड़ो! आज की आशाएं भावी कल की उपलब्धियां हैं।…
हमेशा ऊँचे उड़े चलो, दूर-दूर चलते चलो, बिना हिचके चलो। आज की आशाएँ कल की सिद्धियाँ होगी। संदर्भ : माताजी…