अनुभव का प्रकाश

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सर्वदा अनुभव करो और अपने बढ़ते हुए अनुभवों के प्रकाश में कार्य करो, पर केवल तर्क-वितर्क करने वाले मस्तिष्क के…

उच्चतर चेतना की और छलांग

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मेरे जीवन की जीवन ! मेरी अपनी मधुरतम माँ ! मेरे प्रेम को स्वीकार करो और जैसा तुम बरसों से…

श्रीअरविंद का कार्य

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श्रीअरविंद परम पुरुष के यहाँ से धरती पर एक नयी जाति और एक नए जगत - 'अतिमानसिक '-की घोषणा करने…

संस्थाओं के लिये

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कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती । सच्ची प्रगति है हमेशा 'भगवान' के अधिक निकट आना ।…

समर्पण में आलस्य और दुर्बलता

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श्रद्धा, भगवान् के ऊपर निर्भरता, भागवत शक्ति के प्रति आत्म-समर्पण और आत्मदान-ये सब आवश्यक और अनिवार्य हैं। परन्तु भगवान् के…

भूलों पर सोच विचार

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अपनी अशुद्धियों के बारें में बहुत अधिक सोचते रहने से सहायता नहीं मिलती। अच्छा तो यही है कि अपने मन…

शिष्य की प्रार्थना

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मेरी प्यारी माँ, मेरा हृदय तुम्हारें चरणों की  ओर दौड़ना चाहता है और अपने-आपको तुम्हारे अन्दर खो देना चाहता है…

समय और अभिव्यक्ति

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जिस प्रकार किसी तारे का प्रकाश उस तारे के मिट जाने के सैकड़ों वर्ष बाद पृथ्वी पर पहुंचता है, उसी…

नीरवता के कुछ क्षण

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'तेरे' आगे नीरवता में बीते कुछ क्षण आनंद की शताब्दियों के बराबर हैं। ... ओह ! कितना मधुर है नीरवता…

श्री माँ का संपर्क

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श्रीमाँ का संपर्क सारे दिन और सारी रात भी बना रहता है । अगर तुम सारे दिन उनके साथ उचित…