प्रत्येक रोग स्वस्थता के किसी नवीन आनंद की ओर जाने का एक पथ है, प्रत्येक अमंगल और दुख-ताप प्रकृति का किसी अधिक तीव्र आनंद और मंगल के लिए स्वर मिलाना है, प्रत्येक मृत्यु विशालतम अमरत्व की ओर एक उद्घाटन है। क्यों और कैसे यह बात ऐसी हो सकती है – यह भगवान का गुप्त रहस्य है जिसकी तह में केवल अहंकार-विमुख अंतरात्मा ही पैठ सकता है ।
संदर्भ : विचारमाला और सूत्रावली
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…