श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

अवतारवाद का अर्थ

सर्वशक्तिमान होने के नाते भगवान धरती पर उतरने का झंझट किये बिना ही लोगों को ऊपर उठा सकते हैं। अवतारवाद का तभी कुछ अर्थ होता है जब वह सांसारिक व्यवस्था का एक अंग हो, भगवान मानवजाति का भार अपने ऊपर लें और उसके लिए रास्ता खोलें।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग -३)

शेयर कीजिये

नए आलेख

आंतरिक समझ

​अगर तुम अकेले नहीं हो, बल्कि औरों के साथ रहते हों तो ऐसी आदत डालों…

% दिन पहले

अपने-आपको बुरा-भला कहना

क्या अपने-आपको बुरा-भला कहना प्रगति करने का अच्छा उपाय है ?   अपने-आपको बुरा भला-भला…

% दिन पहले

अच्छे और बुरे स्वप्न

मधुर माँ, हम स्वप्न में अच्छे और बुरे में कैसे फ़र्क़ कर सकते हैं। सिद्धांत…

% दिन पहले

यौगिक कर्म

योग के दृष्टिकोण से, तुम जो करते हो वह नहीं बल्कि तुम कैसे करते हो…

% दिन पहले

सावधानी

अगर तुम जीवन में एक भूल करो तो हो सकता है कि तुम्हें सारे जीवन…

% दिन पहले

समुचित मार्ग

(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…

% दिन पहले