लक्ष्य

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"मनुष्य जो कुछ पहले कर चुका है उसे ही हमेशा दुहराते जाना हमारा काम नहीं है, बल्कि हमें नवीन सिद्धियों…

योग के दो महान् चरणों में से एक

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श्रीमाँ श्रीअरविन्द' की शिष्या नहीं हैं। उन्हें मेरे समान ही सिद्धि और अनुभूति प्राप्त थी। श्रीमाँ की साधना छोटी उम्र…

मिथ्यात्व

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मरने से पहले, मिथ्यात्व अपनी पूरी पेंग में उठता है । अभी तक मनुष्य केवल विध्वंस के पाठ को ही…

दुख का कारण

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यह एक तथ्य है कि जब कोई मार्ग पर समय नष्ट न करने का भरसक प्रयत्न करता है तो जो…

केवल एक ही शक्ति

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प्रायः ही श्रीअरविंद कहते हैं कि व्यक्ति को श्रीमाँ की शक्ति को शासन करने देना चाहिये । क्या इसका यह…

मार्गदर्शन

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मार्गदर्शक स्वयं तुम्हारें अपने अन्दर है। यदि तुम केवल 'उसे' पा सको और 'उसकी' आवाज़ सुन सको, तब तुम यह…

हमारी कोशिश

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संसार दुःख-दर्द और कष्टों से भरा है। हमें कोशिश करनी चाहिये कि कभी किसी के दुःख-दर्द को बढ़ाने वाले न…

प्रार्थना

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मेरी अभीप्सा  तेरी ओर उठ रही है, अपने रूप में सदा वैसी ही बचकानी, अपनी सरलता में अतिसामान्य, लेकिन मेरी…

भारत की भूमिका

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वर्तमान राजनीति में भारत को क्या कोई विशेष भूमिका निभानी है ? ... भारत को जगत में एक भूमिका निभानी…

दुनिया की ग़लतियाँ?

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जब तक तुम्हारें अन्दर धरती को बदलने की शक्ति न हो  तब तक यह कहना बेकार है कि दुनिया ठीक…