मरने से पहले, मिथ्यात्व अपनी पूरी पेंग में उठता है ।

अभी तक मनुष्य केवल विध्वंस के पाठ को ही समझता है। क्या मनुष्य के ‘सत्य’ की ओर आँखें खोलने से पहले उसे आना ही पड़ेगा ?

मैं सबसे प्रयास की मांग करती हूँ ताकि उसे न आना पड़े।

केवल ‘सत्य ‘ ही हमारी रक्षा कर सकता है, वाणी में सत्य, क्रिया में सत्य, संकल्प में सत्य, भावों में सत्य । यह ‘सत्य’ की सेवा करने या नष्ट हो जाने के बीच एक चुनाव है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)

शेयर कीजिये

नए आलेख

प्रार्थना

हे समस्त वरदानों के परम वितरक, तुझे, जो इस जीवन को शुद्ध, सुन्दर और शुभ बना…

% दिन पहले

उनकी कृपा बरसेगी अवश्य…

जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…

% दिन पहले

भय

जिस चीज़ से मनुष्य डरता है, वह तब तक आते रहने की प्रवृत्ति रखती है, जब…

% दिन पहले

भारत माता के योग्य शिशु

​अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…

% दिन पहले

चुनाव

वह समय आ गया है जब हमें एक चुनाव, मौलिक और सुनिश्चित चुनाव करना होगा।…

% दिन पहले

अवलोकन

प्यारी माँ, मैंने देखा है कि 'क' की उपस्थिती में मैं कुछ चीज़ें नहीं कर…

% दिन पहले