अचंचल मन का अर्थ

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अचंचल मन का अर्थ यह नही है कि उसमें कोई विचार या मनोमय गतियाँ एक- दम होगी ही नही, बल्कि…

मन के वाद-विवाद

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प्रश्न : मन मे वाद-विवाद को कैसे रोका जाये ?   पहली शर्त है जितना हों सके उतना कम बोलो…

उदारता

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. . .  मैं यहाँ भौतिक उदारता की चर्चा नहीं करूँगी जिसका स्वाभाविक स्वरूप है अपने पास जो कुछ हो…

पवित्रता

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केवल ईश्वर के ही प्रभाव से प्रभावित होना, और किसी के प्रभाव को स्वीकार न करना - यही पवित्रता है…

न कुछ शुभ,न कुछ अशुभ

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किसी भी ग़लत गति को भूमिगत की जगह उसे निवेदित कर देना चाहिये। उस चीज़ को, स्वयं उस गति को…

पथ पर डटे रहो

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तुम सभी, मेरे बच्चो, मैं तुमसे यह कह सकती हूँ, मैंने यह कई बार दोहराया है और एक बार फिर…

योग के लिए आना

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जीवन से और लोगों से घृणा और विरक्ति के कारण इस योग के लिए नहीं आना चाहिये। कठिनाइयों से भाग…

धर्मक्षेत्र

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सारा जीवन ही धर्मक्षेत्र है, संसार भी धर्म है। केवल आध्यात्मिक ज्ञानलोचना और शक्ति की भावना धर्म नहीं, कर्म भी…

गर्व को त्यागने का तरीका

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भगवान् के प्रति पूर्ण आत्मदान के लिए तीन विशेष विधियां : १. सारे गर्व को त्याग कर पूर्ण नम्रता के…

ज्ञान और बुद्धि

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मधुर माँ,  ज्ञान और बुद्धि क्या हैं ? क्या हमारे जीवन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है ? ज्ञान और बुद्धि…