समस्त क्रिया कलापों का उत्सर्ग

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मधुर माँ, आपने बहुत बार कहा है कि हमारे क्रिया कलाप भगवान के प्रति उत्सर्ग होने चाहियें। इसका ठीक-ठीक अर्थ…

स्वतंत्र सत्ता

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हर के के अन्दर अपने अहंकार होते हैं और सभी अहंकार एक-दूसरे से टकराते रहते हैं। आदमी स्वतंत्र सत्ता तभी…

आर्थिक समस्या का समाधान

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क्या चेतना के सुधार से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति सुस्थिर हो जाती है? यदि "चेतना के सुधार" का मतलब है…

गुफा की साधना

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मैं नहीं मानती की गुफा की साधना आसान हे-केवल, वहां कपट छिपा रहता है जबकि क्रियाकलाप और जीवन में वह…

दूर रह कर सहायता ग्रहण करना

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अगर वह दूर से सहायता ग्रहण नहीं कर सकता तो यहाँ रह कर योग जारी रखने की आशा कैसे कर…

हिंदु धर्म

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एष: धर्म: सनातन: । हिंदु धर्म कोई संप्रदाय या मतान्ध धर्म सिद्धान्त, सूत्रो की गठरी, सामाजिक नियमों का संग्रह नहीं…

रूपांतर

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बाहर के सारे शोर को चुप कर दो, भगवान की सहायता के लिए अभीप्सा करो। जब वह आये तो उसकी…

चैत्य पुरुष

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जो चीज़ योग करने का संकल्प करती है वह तुम्हारा शरीर या तुम्हारा प्राण, यहाँ तक कि तुम्हारा मन भी…

सत्य

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सत्य लकीर की तरह नहीं सर्वांगीण है, वह उत्तरोत्तर नहीं बल्कि समकालिक है। अतः उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया…

हृदय

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भगवान हमेशा तुम्हारें हृदय में आसीन होते हैं , सचेतन रूप से जीवित रहते है । संदर्भ : माताजी के…