मैं नहीं मानती की गुफा की साधना आसान हे-केवल, वहां कपट छिपा रहता है जबकि क्रियाकलाप और जीवन में वह प्रकट हो जाता है । तुम गुफा में योगी-से दीख सकते हो परन्तु जीवन में छल-कपट ज्यादा कठिन है क्योंकि तुम्हें योगी की तरह व्यवहार करना पड़ता है ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…
जब कोई बात दूसरे व्यक्ति के अन्दर तुम्हें एकदम अवांछनीय या हास्यास्पद प्रतीत हो --…