बाहर के सारे शोर को चुप कर दो, भगवान की सहायता के लिए अभीप्सा करो। जब वह आये तो उसकी और पूर्ण रूप से खुलो और उसकी क्रिया के आगे समर्पण करो। वह प्रभावकारी रूप से तुम्हारा रूपांतर ला देगी।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-३)
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