अंतर में माताजी की उपस्थिति

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उसे अपने भीतर जाना होगा और अंतर में भगवती माता की और हृदय के पीछे चैत्य पुरुष की उपस्थिति को…

ईश्वर : श्रीअरविन्द की कविता

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  तू जो कि सर्वव्याप्त है समस्त निचले लोकों में , फिर भी है विराजमान बहुत ऊपर , उन सबका…

श्रीमाँ का साक्षात्कार

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क्या श्रीमां के अन्तर्दर्शन को अथवा स्वप्न या जागृत अवस्था में उन्हें देखने को साक्षात्कार कहा जा सकता है? वह…

पूर्ण स्वतंत्रता

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यदि तुम उस चेतना में रहते हो जो मनद्वारा कार्य करती है, चाहे वह उच्चतम मन ही क्यों न हो,…

शरीर की सम्पूर्ण पूर्णता

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व्यायाम करना और सरल तथा स्वस्थ जीवन जीना अच्छा है, लेकिन शरीर के सचमुच पूर्ण होने के लिए, उसे भागवत…

केवल ‘तू’

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सूर्य की तरह तेरी ज्योति पृथ्वी पर उतर रही है और तेरी किरणें विश्व को आलोकित कर देंगी। जो सब…

चीजों को रुचिकर कैसे बनाये

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मधुर माँ, मैं पहली दिसम्बर (वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ) के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हूँ, और मैं जरा भी…

प्रार्थना

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अत्यंत प्रचंड आंधी-तूफानमें भी दो चीजें अडोल बनी रहती हैं : यह संकल्प कि सब लोग वास्तविक प्रसन्नता- तेरी प्रसन्नता…

कृष्ण

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अंततः मुझे मिला इस मधुर और भीषण जगत में आत्मा के जन्म का उद्देश्य, मैंने अनुभव किया पृथ्वी का क्षुधित…

माताजी की सतत उपस्थिति का तात्पर्य

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आपने कहा है, “हमेशा इस प्रकार व्यवहार करो मानों श्रीमां तुम्हारी और ताक रही हों; क्योंकि वह, सचमुच, हमेशा उपस्थित…