उस कार्य को करने के लिए ही हमने जन्म किया ग्रहण,
कि जगत को उठा प्रभु तक ले जाएं, उस शाश्वत प्रकाश में पहुंचाएँ,
और प्रभु को उतार जगत पर ले आएँ; इसलिए हम भू पर आये
कि इस पार्थिव जीवन को दिव्य जीवन में कर दे रूपांतरित ।
संदर्भ : सावित्री
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…
सारी समस्या का निचोड़ यह है : बुद्धि के मानसिक प्रशासन की जगह आध्यात्मिक चेतना…