व्यक्ति को हमेशा हँसना चाहिये, हमेशा। ‘प्रभु’ हँसते है और हँसते रहते हैं। ‘उनका’ हास्य इतना अच्छा है, इतना अच्छा है, प्रेम से इतना परिपूर्ण है। यह ऐसा हास्य है जो तुम्हें असाधारण मधुरता के साथ अपनी भुजाओं में भर लेता है !

मनुष्यों ने उसे भी विकृत कर दिया है – उन्होने हर चीज़ विकृत कर दी है। (माताजी हँसती है )

संदर्भ : पथ पर 

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