व्यक्ति को हमेशा हँसना चाहिये, हमेशा। ‘प्रभु’ हँसते है और हँसते रहते हैं। ‘उनका’ हास्य इतना अच्छा है, इतना अच्छा है, प्रेम से इतना परिपूर्ण है। यह ऐसा हास्य है जो तुम्हें असाधारण मधुरता के साथ अपनी भुजाओं में भर लेता है !
मनुष्यों ने उसे भी विकृत कर दिया है – उन्होने हर चीज़ विकृत कर दी है। (माताजी हँसती है )
संदर्भ : पथ पर
भगवान के प्रति पूर्ण आत्म-दान के लिए तीन विशेष विधियाँ : (१) सारे गर्व को…
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…