स्वाधीनता बाहरी परिस्थितियों से नहीं बल्कि आन्तरिक मुक्ति से आती है । अपनी आत्मा को पहचानो, उसके साथ एक हो जाओ , वह तुम्हारें जीवन पर शासन करे, और तुम स्वतंत्र हो जाओगे।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…