स्वाधीनता बाहरी परिस्थितियों से नहीं बल्कि आन्तरिक मुक्ति से आती है । अपनी आत्मा को पहचानो, उसके साथ एक हो जाओ , वह तुम्हारें जीवन पर शासन करे, और तुम स्वतंत्र हो जाओगे।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…