साधना के दौरान थकान

साधना के दौरान इस तरह की थकान कई कारणों से आ सकती है :

१. शरीर जितना ले सकने के लिए तैयार हो उससे ज़्यादा प्राप्त करने से थकान आ सकती है। तब इसका इलाज है-सचेतन अचञ्चलता में शक्तियों को ग्रहण करना, लेकिन इसका उद्देश्य हो, केवल शक्ति तथा ऊर्जा को फिर से पाना, और कोई हेतु न हो।

२. हो सकता है कि इसका कारण निष्क्रियता हो जिसने तमस् का रूप ले लिया है—निष्क्रियता चेतना को नीचे भौतिक स्तर पर खींच लाती है जो थकान में बदल कर तमस् की ओर झुक जाती है। यहाँ इलाज है–तमस् में नहीं, बल्कि दोबारा सच्ची चेतना में जाकर आराम करना।

३. बहुत अधिक शारीरिक परिश्रम के द्वारा भी थकान आ सकती है-जब शरीर को पर्याप्त नीद या आराम न दिया जाये। शरीर योग का आधार है, लेकिन इसकी ऊर्जा असीम नहीं है और इसे भी किफ़ायत से खर्च करना होता है; वैश्व प्राणिक शक्ति से ऊर्जा ग्रहण कर इसे बनाये रखा जा सकता है, लेकिन उस शक्ति की भी अपनी सीमाएँ हैं। व्यक्ति को आलसी और निष्क्रिय तो एकदम नहीं बनना चाहिये, लेकिन प्रगति की ललक में भी कुछ नियन्त्रण तो रखना ही होता है।

संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र

शेयर कीजिये

नए आलेख

आश्रम के दो वातावरण

आश्रम में दो तरह के वातावरण हैं, हमारा तथा साधकों का। जब ऐसे व्यक्ति जिसमें…

% दिन पहले

ठोकरें क्यों ?

मनुष्य-जीवन के अधिकांश भाग की कृत्रिमता ही उसकी अनेक बुद्धमूल व्याधियों का कारण है, वह…

% दिन पहले

समुचित मनोभाव

सब कुछ माताजी पर छोड़ देना, पूर्ण रूप से उन्ही पर भरोसा रखना और उन्हें…

% दिन पहले

देवत्‍व का लक्षण

श्रीअरविंद हमसे कहते हैं कि सभी परिस्थितियों में प्रेम को विकीरत करते रहना ही देवत्व…

% दिन पहले

भगवान की इच्छा

तुम्हें बस शान्त-स्थिर और अपने पथ का अनुसरण करने में दृढ़ बनें रहना है और…

% दिन पहले

गुप्त अभिप्राय

... सामान्य व्यक्ति में ऐसी बहुत-से चीज़ें रहती हैं, जिनके बारे में वह सचेतन नहीं…

% दिन पहले