मेरे बच्चे सहन करो! और पूरी श्रद्धा रखते हुए परम प्रभु के हृदय में बस एक नवजात शिशु की तरह दुबके रहो। अंतत:, एक अनंत परमानन्द में तुम खिल उठोगे …
संदर्भ : माँ तुमने ऐसा कहा था
(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…
अवतार की सम्भावना पर विश्वास करने या न करने से प्रकट तथ्य पर कोई फ़र्क़…
यदि चैत्य पुरुष की प्रकृति जाग्रत हो जाए, अपने पीछे विद्यमान माताजी की चेतना और…
भागवत चेतना की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं। रूपांतर की भी विभिन्न अवस्थाएँ होती है। पहली…