समग्र योग का अर्थ

समग्र योग इसलिए कहा गया है क्योंकि आध्यात्मिक सिद्धि तथा अनुभव की सामंजस्यपूर्ण संपूर्णता प्राप्त करना इसका लक्ष्य है। इसका लक्ष्य है भागवत सत्य का समग्र अनुभव, जिसका वर्णन गीता ‘समग्र माम’ शब्दों में करती है, भागवत सत्ता का ‘मेरा अखंडित’ स्वरूप। इसकी पद्धति है समस्त चेतना, मन, हृदय, जीवन, शरीर का उस सत्य के प्रति, भागवत सत-चित आनंद के प्रति, उसकी सत्ता तथा समस्त प्रकृति के इसके समग्र रूपांतर के प्रति समग्र उदघाटन ।

संदर्भ : श्रीअरविंद (खण्ड-१२)

 

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