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सतत और निर्विकार उपस्थिती

भगवान सब जगह, सब चीजों में हैं, उन चीजों में भी जिन्हें हम फेंक देते हैं और उनमें भी जिन्हें हम बहुत सावधानी के साथ सँजो कर रखते हैं, उनमें जिन्हें हम पैरों से कुचलते हैं और उनमें भी जिनकी हम आराधना करते हैं। हमें आदर के साथ जीना सीखना चाहिये और ‘उनकी’ सतत और निर्विकार उपस्थिती को कभी नहीं भूलना चाहिये।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

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