श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

श्रीमाँ का साक्षात्कार

क्या श्रीमां के अन्तर्दर्शन को अथवा स्वप्न या जागृत अवस्था में उन्हें देखने को साक्षात्कार कहा जा सकता है?

वह साक्षात्कार न होकर अनुभव होगा। साक्षात्कार होगा अपने अंदर माताजी की उपस्थिति को देखना, उनकी शक्ति को कार्य करते अनुभव करना–अथवा सर्वत्र शांति या निश्चल-नीरवता का, वैश्व प्रेम, वैश्व सौन्दर्य या आनंद आदि- आदि का साक्षात्कार करना। अन्तर्दर्शन अनुभवों की श्रेणी में आते हैं, जबतक वे अपने को स्थिर रूप से प्रतिष्ठित न कर लें और उनके साथ एक ऐसा साक्षात्कार न हो जिसे वे मानों सहारा देते हैं–उदाहरणार्थ, हृदय में या सिर के ऊपर सदा माताजी का सूक्ष्मदर्शन इत्यादि।

१२-३-१९३४

सन्दर्भ : माताजी के विषय में 

शेयर कीजिये

नए आलेख

स्थायी अचंचलता

ध्यान के द्वारा प्राप्त किया गया अचंचल मन सचमुच बहुत कम समय के लिए रहता…

% दिन पहले

शांति मंत्र

मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…

% दिन पहले

घर और काम में साधना

तुम्हारें लिए यह बिल्कुल संभव है कि तुम घर पर और अपने काम के बीच…

% दिन पहले

अपात्रता का भाव

अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…

% दिन पहले

दो चीज़ें

ये दो चीज़ें एकदम अनिवार्य है : सहनशक्ति और एक ऐसी श्रद्धा जिसे कोई भी…

% दिन पहले

कभी मत बुड़बुड़ाओ

कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्‌बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…

% दिन पहले