शान्ति, समस्त भू पर शान्ति!

वर दे कि सभी सामान्य चेतना से बच निकलें और जड़-भौतिक वस्तुओं के लिए आसक्ति से मुक्ति पा लें; वर दे कि वे तेरी दिव्या
उपस्थिति के ज्ञान के बारे में जाग्रत् हों, तेरी परम चेतना के साथ युक्त होकर उससे उमड़ने वाली शान्ति के प्राचर्य का रसास्वादन करें।

प्रभो, तू हमारी सत्ता का सर्वोच्च स्वामी है। तेरा विधान ही हमारा विधान है और अपनी पूरी सामर्थ्य के साथ हम अपनी चेतना को तेरी शाश्वत चेतना के साथ युक्त करने के लिए अभीप्सा करते हैं ताकि हम हर क्षण, हर वस्तु में तेरे उत्कृष्ट कार्य को चरितार्थ कर सकें।

प्रभो, हमें सभी संयोगों की चिन्ताओं से मुक्त कर, हमें वस्तुओं के बारे में सामान्य दृष्टिकोण से मुक्त कर। वर दे कि हम भविष्य
में केवल तेरी ही आँखों से देखें और केवल तेरी ही इच्छा से कार्य करें। हमें अपने दिव्य प्रेम की जीवन्त मशालों में रूपान्तरित कर।

हे प्रभो, श्रद्धा और भक्ति के साथ, समस्त सत्ता के आनन्द-भरे समर्पण में मैं अपने-आपको तेरे विधान की परिपूर्ति के लिए अर्पित
करती हूँ।

शान्ति, समस्त पृथ्वी पर शान्ति!

 

संदर्भ : प्रार्थना और ध्यान 

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