मैं आपसे फिर से पूछता हूँ माँ, वह कौन-सी चीज़ है जो मेरी सत्ता को विभक्त करती है ?
संघर्ष है उसके बीच जो चेतना के लिए अभीप्सा करता है यानि सत्ता का ‘सात्विक’ भाग और दूसरा है सत्ता का ‘तामसिक’ भाग जो अपने ऊपर निश्चेतना का आक्रमण और शासन होने देता है, एक वह जो ऊपर की ओर धकेलता है और दूसरा वह जो नीचे की ओर खीचता हैं, अतः वह सब प्रकार के बाहरी प्रभावों के आधीन है ।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…