माँ, क्या अपने अन्दर रोगमुक्त करने की क्षमता विकसित करना सम्भव है?
सिद्धान्त रूप में, सचेतन रूप से दिव्य शक्ति के साथ एक होने से सब । कुछ सम्भव है। लेकिन उपाय खोजना होगा और यह व्यक्ति और स्थिति पर निर्भर करता है। पहली शर्त है, ऐसी भौतिक प्रकृति का होना जो औरों से ऊर्जा खींचने की जगह ऊर्जा देती है। दूसरी अनिवार्य शर्त है, यह जानना कि ऊपर से, अक्षय, निवैयक्तिक स्रोत से ऊर्जा को कैसे खींचा जाये।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…