‘भागवत उपस्थिति’ दिन-रात सतत मौजूद है ।
चुपचाप अन्दर की ओर मुड़ना काफी है और हम उसे पा लेंगे ।
संदर्भ :माताजी के वचन (भाग – २)
क्या अपने-आपको बुरा-भला कहना प्रगति करने का अच्छा उपाय है ? अपने-आपको बुरा भला-भला…
मधुर माँ, हम स्वप्न में अच्छे और बुरे में कैसे फ़र्क़ कर सकते हैं। सिद्धांत…
(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…