भगवान के तरीके मानव-मन के तरीकों जैसे नहीं है या हमारे आदर्शों के अनुरूप नहीं होते और उनके विषय में निर्णय करना या भगवान के लिए यह निर्धारित करना कि उन्हें क्या करना या क्या नहीं करना चाहिए, असंभव है , क्योकि हम जैसा जान सकते है उससे कही अच्छा भगवान जानते है। यदि हम ज़रा भी भगवान को मानते है तो यथार्थ बुद्धि और भक्ति दोनों ही मुझे सुस्पष्ट श्रद्धा और समर्पण-भाव की मांग करने में एकमत प्रतीत होती है।

संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग-२)

शेयर कीजिये

नए आलेख

प्रार्थना

अब, हे परमेश्वर, चीजें बदल गयी है। विश्राम और तैयारी का काल समाप्त हो गया…

% दिन पहले

मृत्यु की अनिवार्यता

जब शरीर बढ़ती हुई पूर्णता की ओर सतत प्रगति करने की कला सीख ले तो…

% दिन पहले

चुनाव करना

हर एक के जीवन में एक ऐसा क्षण आता है जब उसे दिव्य मार्ग और…

% दिन पहले

अनुभव का क्षेत्र

अगर तुम कुछ न करो तो तुम्हें अनुभव नहीं हो सकता। सारा जीवन अनुभव का…

% दिन पहले

सच्चा उत्तर

एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…

% दिन पहले

आश्वासन

मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…

% दिन पहले