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बुढ़ापा और मृत्यु

केवल वही वर्ष जो व्यर्थ में गुजरते हैं, तुम्हें बूढ़ा बना देते हैं ।

वह वर्ष व्यर्थ जाता है जिसमें कोई प्रगति नहीं होती, चेतना की कोई वृद्धि नहीं होती, पूर्णता की ओर कोई पग नहीं उठाया जाता ।

अपना जीवन किसी उच्चतर और बृहत्तर चीज़ की उपलब्धि की ओर निवेदित कर दो तो तुम्हें कभी गुजरते हुए वर्षों का भार अनुभव न होगा ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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