गार्गी के पेट अक्सर खराब हो जाता था। श्रीमाँ ने उसके लिए एक नन्हा, प्यारा-सा कार्ड भेजा, उस पर एक मज़ाकिया खरगोश का कार्टून-चित्र बना था जो एक कटोरे में से खा रहा था। कार्ड के नीचे श्रीमाँ ने लिखा
“यह तुम्हें हँसाने के लिए है। हँसना पेट के लिए बहुत अच्छा है । ”
संदर्भ : श्रीअरविंद एवं श्रीमाँ की दिव्य लीला
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…