मेरे मौन और विनम्र पूजा-भाव के साथ प्रणाम … ।
मैं तेरी महिमा के आगे नमन करती हूँ क्योंकि वह अपनी सारी भव्यता के साथ मुझ पर छा जाती है ।…
कृपा कर कि मैं तेरे चरणों में घुल-मिल जाऊँ, तेरे अंदर गल जाऊँ !
संदर्भ : प्रार्थना और ध्यान
भूल या सजा देने का कोई प्रश्न ही नहीं है-अगर लोगों को हम उनकी भूलों…
इन छोटी-छोटी बातों से क्यों उत्तेजित हो जाते हो? या उनसे अपने को क्यों विचलित…
जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी…
भगवान मुझसे क्या चाहते है ? वे चाहते है कि पहले तुम अपने-आपको पा लो,…