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दास मनोवृत्ति

कुछ लोग है जो अपने पैरों पे खड़े रह सकते हैं। वे कोई चीज़ इसलिए करते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि उसे करना अच्छा है। वे अपने आपको निर्बाध रूप से गुरु को अर्पित कर देते हैं और उनके बताये मार्ग पर चलते हैं। लेकिन सारे समय यह एक निर्बाध क्रिया होती है। कुछ और हैं जो दास होते हैं। वे जो कुछ करते हैं उसके लिए कोई सामाजिक या शासकीय मान्यता चाहते हैं । उनके अंदर आत्मविश्वास केवल तभी हो सकता है जब कोई सत्ताधारी उन्हें मान्यता दे । यह दास मनोवृत्ति है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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