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थकान का कारण

तुम जो करते हो उसे बिना रुचि के करने से थकान आती है । तुम जो कुछ करो उसमें रुचि ले सकते हो बशर्ते कि तुम उसे प्रगति के साधन के रूप में लो; तुम जो कुछ करो उसे तुम्हें अच्छे-से-अच्छा करने की कोशिश करनी चाहिये । प्रगति का संकल्प हमेशा होना चाहिये और तब तुम जो कुछ करते हो उसमें रस लेते हो, चाहे वह कुछ भी हो । अगर तुम उसे इस दृष्टिकोण से लो तो एकदम नगण्य कार्य भी रुचिकर हो सकता है ।

और बहुत अधिक आकर्षक ओर महत्त्वपूर्ण क्रिया भी तुम्हारे लिए अपनी सारी रुचि खो बैठती है अगर उसे करते समय किसी आदर्श पूर्णता के प्रति प्रगति करने का तुम्हारे अन्दर संकल्प न हो ।

संदर्भ : माताजी के वचन ( भाग-२ )

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