श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

तेरी नयी अभिव्यक्ति

… मैं सभी वस्तुओं में प्रवेश करती हूँ, प्रत्येक परमाणु के हृदय में निवास करते हुए मैं वहाँ उस अग्नि को उद्बुद्ध करती हूँ जो शुद्ध करती और रूपांतरित करती है ,यह एक ऐसी अग्नि है जो कभी नहीं बुझती, जो तेरे परमआनंद की संदेशवाहक ज्वाला है , समस्त पूर्णताओं की सिद्धिदाता है ।

तब यही प्रेम नीरवता के साथ ध्यानशील बन जाता है और हे अज्ञेय भव्यता, वह तेरी ओर मुड़ कर आनंद में ‘तेरी नयी अभिव्यक्ति’ की प्रतीक्षा में हैं …

संदर्भ : प्रार्थना और ध्यान 

 

 

शेयर कीजिये

नए आलेख

पूर्ण आत्म-दान की तीन विधियाँ

भगवान के प्रति पूर्ण आत्म-दान के लिए तीन विशेष विधियाँ : (१) सारे गर्व को…

% दिन पहले

शिकायतों का महत्त्व

'ख' ने मुझसे कहा है कि आपके पास मेरे विरुद्ध यह शिकायत आयी है कि…

% दिन पहले

उचित वृत्ति

कुछ ऐसे अति-धर्मशील लोग होते है जो अपने सामने समस्याएँ  तो खड़ी कर लेते हैं,…

% दिन पहले

श्रीअरविंद से मिलना

श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…

% दिन पहले

उपस्थिति का अनुभव

हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…

% दिन पहले

ध्यान कहाँ?

मधुर माँ , यहाँ  अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल…

% दिन पहले