अपनी मान्यता को साथ रखो यदि तुमको यह लगता हो कि वह तुम्हारें जीवन के निर्माण में सहायक है ; पर समझ लो कि यह सिर्फ एक मान्यता है तथा दूसरी मान्यताएँ भी इतनी ही अच्छी और यथार्थ है जितनी कि तुम्हारी।
संदर्भ : माताजी का एजेंडा (भाग-१)
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…