कोई भी व्यक्ति अपनी चेतना को मानसिक और प्राणिक स्तर से ऊपर उठा सकता है और ऊपर से शक्ति, आनंद, प्रकाश ,ज्ञान को नीचे उतार ला सकता है; लेकिन यह कहीं अधिक कठिन और अपने परिणाम में अनिश्चित है, साथ ही खतरनाक भी, यदि सत्ता तैयार न हो या पर्याप्त रूप से शुद्ध न हो। इस उद्देश्य से चैत्य के साथ आरोहण करना निश्चित रूप से सर्वश्रेष्ठ मार्ग है ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग-२)
जब तुम अधीर हो उठो और अपने-आपसे कहो : "आह, मुझे यह करने में सफल…
श्रद्धा, भगवान् के ऊपर निर्भरता, भागवत शक्ति के प्रति आत्म-समर्पण और आत्मदान-ये सब आवश्यक और…
तुम्हें चीजों को उसी तरह बढ़ने देना चाहिये जैसे प्रकृति में पौधे बढ़ते हैं। हम…
समस्त धन-सम्पदा भगवान् की है, भगवान् उसे जीवित प्राणियों को उधार देते है और स्वभावत:…
सत्ता के पूर्ण आध्यात्मिक जीवन के लिये तैयार हों जाने से पहले सांसारिक जीवन का…