काम-वासनाएँ अच्छा खाने से नहीं आती, बल्कि गलत तरीके से सोचने और उसी पर केन्द्रित होने से आती है । तुम उसके बारें में जितना ही कम सोचो उतना ही अच्छा है। तुम उस बात पर जोर न दो जो तुम बनना नहीं चाहते, इसके विपरीत उस पर जोर दो जो तुम बनना चाहते हो।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…
सारी समस्या का निचोड़ यह है : बुद्धि के मानसिक प्रशासन की जगह आध्यात्मिक चेतना…