काम-वासनाएँ अच्छा खाने से नहीं आती, बल्कि गलत तरीके से सोचने और उसी पर केन्द्रित होने से आती है । तुम उसके बारें में जितना ही कम सोचो उतना ही अच्छा है। तुम उस बात पर जोर न दो जो तुम बनना नहीं चाहते, इसके विपरीत उस पर  जोर दो जो तुम बनना चाहते हो।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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